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Monday, October 30, 2017

Survival वाला ब्लॉग पढ़ें और इस आलेख की समीक्षा करें कि नारी या पुरुष की सेक्स स्वतंत्रता कैसी हो।

फ्री सेक्स को ही नारी स्वतंत्रता का केंद्र बिंदु और सबसे बड़ा अधिकार समझने-समझाने वाली, इसको ही नारी विमर्श का नाम देने वाली विद्वान नारियों के साथ उनका समर्थन करने वाले विद्वान पुरुषों को भी नमस्कार! देखिए, आप समाज को कहां पहुंचा रहे हैं। ऐसा नहीं कि जब आप नहीं थे तब ऐसा नहीं होता था लेकिन अब जबकि आप कइयों की प्रेरणा हैं तो अपने इस अमूल्य योगदान के लिए धन्यवाद तो ले ही लीजिए...।
     तीन दिन पहले रोहिणी में एक पति ने अपनी पत्नी की हत्या कर दी। पति के छह-सात नारियों से संबंध थे और पत्नी आड़े आ रही थी। यह वही पुरुष है जो सेक्स से अधिक नहीं सोचता और वे छह-सात वहीं स्त्रियां हैं जो उसे ही अपनी स्वतंत्रता समझती हैं। इन स्वतंत्रता के पुजारियों ने एक स्त्री के जीने की स्वतंत्रता छीन ली...।
    कल, ताइक्वांडो का दो-दो साल नेशनल चैंपियन रह चुका एक लड़का पकड़ा गया। उसकी छह-सात गर्ल फ्रेंड्स हैं। सबके खर्चे उठाने के लिए वह लूट करने लगा। हाईकोर्ट के वकील का बेटा है। घर वालों का कहना नहीं माना तो आजिज आकर घर से निकाल दिया परिजनों ने। अब वह जेल में रहेगा...। वह छह-सात लड़कियां अब कोई और 'शिकार' करेंगी...।
     यह प्रेम तो कतई नहीं है। हवस पुरुष का हो या स्त्री का वह अधिकार नहीं है। इतनी स्वतंत्रता किसी की भी ठीक नहीं, वह चाहे लड़की हो या लड़का। इसलिए नारी विमर्श के नाम पर इस तरह के अधिकार का ज्ञान बांटना बंद कीजिए। जिस हवस के कारण कुछ पुरुष आदमी से दानव बन गए, उनकी बराबरी करने के लिए यह कहकर लड़कियों को प्रेरित न कीजिए कि जब पुरुष करते हैं तो स्त्री क्यों नही? स्त्री हो या पुरुष, एक का पतन दूसरे के पतन की कहानी लिख देता है इसलिए समाज को स्त्री-पुरुष में बांटकर ज्ञान बांटना बन्द कीजिए। सबकी स्वतंत्रता जरूरी है लेकिन संयम भी जरूरी है। सभी युवाओं के अधिकार हैं लेकिन उनके माता-पिता के भी अधिकार हैं उन्हें गलत-सही पर डांटने-बोलने का। हर बात में अभिभावकों का अधिकार यह कहकर न छीनिए कि लड़का-लड़की बालिग हैं। कानून के दायरे में रहकर सामाजिक मूल्यों का ख्याल रखिए। जब किसी को स्वतंत्रता का ज्ञान बांटिए तो यह भी जरूर समझाइए कि स्वतंत्रता के साथ आत्म संयम, अनुशासन कितना जरूरी है वरना इस पाप में आप भी भागी हैं क्योंकि आप अनुशासनविहीन स्वतंत्रता का ज्ञान बांट रहे हैं जो वास्तव में उच्छृंखलता है।

Tuesday, October 24, 2017

गुजरात चुनाव के मद्देनजरगुजरात के चुनावी जुमलों से एक बार फिर गुजरती या फिर पूरा अवाम गुमराह हो,इससे पहले वहां के मतदाता जागरूकता अभियान चलायेन कि अब केवल बिहारी हीं नहीं बल्कि गुजरती भी *******/

Bulletin-60+2 chunav Bihar 15 J P message for system change:Bulletin-60+1Bulletin-60 complement to SPECIAL Bulletin-59 BIHAR KE CHUNAV 15 JPEG copyThe BIHARIS" who share this views may distribute its pump-lets in their assembly constituency.जंगल जंगल ढूँढ रहा है. मृग अपनी कस्तूरी को. कितना मुश्किल है तय करना. खुद से खुद की दूरी को...!!!            गुजरात के चुनावी जुमलों से एक बार फिर गुजरती या फिर पूरा अवाम गुमराह हो,इससे पहले वहां के मतदाता जागरूकता अभियान चलायेन कि अब केवल बिहारी हीं नहीं बल्कि गुजरती भी *******/

Sunday, September 10, 2017

Rashtra bhakti aur bhawna se khelna ,n to desh hit me hai air n janta me hit me.

 आदरणीय बाबा रामदेव जी,
भारत के लाखों लोग पतंजलि और दिव्य योग के उत्पादों का प्रयोग इस लिए ही नहीं करते कि वह गुणवत्ता मैं बहुत अच्छी है बल्कि लोग शुरू शुरू में आपके उत्पादों का प्रयोग राष्ट्रीयता और देशभक्ति के साथ-साथ कम दाम के कारण भी खरीदते थे ।
शुरुआत में आपने स्वयं को प्रचार विरोधी बताकर पतंजलि उत्पाद को अच्छी गुणवत्ता के साथ मार्केट में उतारा जो सही भी था और लोगों ने उसे पसंद भी किया परंतु धीरे-धीरे कब आपके सामानों की कीमत ज्यादा होती चली गई पता न चला ।
और अब इतनी ज्यादा हो चुकी है की चिंता का विषय बन चुका है ।
अब TV पर हर तीसरा प्रचार पतंजलि का है तो क्या इससे यह लगाया जाए कि आप भी अर्थ तंत्र की एक बड़ी मछली के रूप में सामानों को महंगे दामों पर बेचेंगे?
जो चूर्ण 2015 में 40 का था वही 2016 में 85 का कैसे हो गया ?
100% से भी ज्यादा की बढ़ोतरी ..?
मई 2016 में जिस बादाम रोगन का दाम 110 रुपये था ऐसा क्या हुआ कि वह मात्र 9 माह बाद मार्च 2017 में 150 का हो गया यानी 36% कि बढ़ोत्तरी । यह मूल्य वर्धन की पराकाष्ठा या त्रासदी है । मुझे आपसे यह उम्मीद नहीं थी । ऐसे ही 2 माह पहले बेसन का दाम राजधानी बेसन से 15 रुपये सस्ता था और आज 15 रुपये महंगा हो गया है ।
अब मुझे ऐसा लगने लगा है कि आप के उत्पाद की न्यूरोमार्केटिंग से बाहर आकर मुझे सोचना पड़ेगा क्यों कि आप जनता का बेवकूफ काटने लगे हैं । भावना और देशभक्ति बेचने के दिन लद गए......
जनता को भी अब यथार्थ पर आना चाहिए और पतंजलि को भी अपने उत्पाद सही दामों पर बेचने का दबाव बनाना चाहिए ।
और साथ साथ यह भी बताइये की आप पहले कैमिकल का विरोध करते थे तो आपके शैम्पू और आपके साबुनों में क्या लक्ष्मन को जीवित करनेवाला जड़ीबूटी डाला है क्या......
हमे ये बताइये आपके ब्यूटी-प्रोडक्ट्स, फेसवाश, सर्फ़, स्लिम-पाउडर ये सब क्या आपने बिना कैमिकल के ही बना लिया
और आपको नूडल्स बनाने की क्या पर गयी......ये तो चीन का भोजन है और उसका कॉपी करके आपका किस देशभक्ति का काम कर रहे है.....आपके बिस्कुट आपके चोकोफ्लेक्स क्या ये सब विदेशी सामानों का नक़ल नही है.......अगर आप देशभक्ति का काम करते तो हर सामान आप और कंपनियों की भांति या उससे भी महंगे दामो में नही बेचते लेकिन नही. आपने तो धंधा शुरू कर दिया........योग सिखाते सिखाते आप कब बिजनेसमैन बन गए पता ही नही चला
धीरे धीरे आपके देशभक्ति वाले उत्पाद आम आदमी के पहुच से बाहर हो रहे है..
दोस्तों इसे ज़रूर शेयर करे क्यों की आजकल की पब्लिक सब समझती है बस ज़रूरत है उन्हें थोड़ा बताने की और जागरूक करने की इसलिए इस तरफ ज़रूर ध्यान दें क्योंकि देश में एकाधिकार का जनम हो रहा है जो लोकतंत्र के लिए घातक साबित हो सकता है इसलिए हर गलत दिशा में उठते हुए कदम का विरोध करना है।

स्वदेशी के नाम डकैती अब बन्द होना चाहिए ।

वन्देमातरम

Tuesday, August 29, 2017

ढोकलाम में चीन का पीछे हटना,भारत की जनता का दबाव है,जिसने चीनी सामान का बाई काट किया।

 ढोकलाम में चीन का पीछे हटना,भारत की जनता का दबाव है,जिसने चीनी सामान का बाई काट किया। और सन 1962 की रेखा के पार पहुंचाना चाहते हो तो टोटल बायकॉट करो।

Sunday, August 20, 2017

बिहार की राजनीती

 बिहार की राजनीती बाढ़ से नहीं बल्कि बहार से चलती है और बहार युवाओं के फुहार से !क्या युवा राजनीती के नये रंग से देश को सराबोर करेंगे?"जितना खुला खुला सा दिल है,उतनी बंदिश बढ़ी मुश्किल है।"

Tuesday, August 15, 2017

71वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर vआप सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। 800 करोड़ की बेनामी सम्पति जप्त,लाल किले से 70 साल बाद आई आवाज।पर इस सम्पति के मालिको का नाम जनता को सार्वजनिक किया जायेगा! 

Monday, July 31, 2017

हे दिल्ली तुझको समालकम

कंधे का बोतल पटक दिया।सिर पर से बोतल उतर गया।।ढंनमन सब बोतल जमींदोज़ हुए। अब आर.ओ.का बोतल कहाँ गया? पहचानो फिर से हे दिल्ली!