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Monday, December 31, 2018

Video0015 2 मैं पता भर दिया,तुम लगे पूछने।

Thursday, December 27, 2018

क्या यह सामाजिक व्यवस्था के तहत दिए गये दंन्ड की उपज 124वां संविधान संसोधन है?अगर है तो,बील सदनों से पास होने पर अब दुगने उत्साह से ने.नो.पार्टी पर काम होना चाहिए,जिससे यह जल्द क्रियान्वित हो।अधिक से अधिक नोटा को अपनाए।। नये साल का तोहफा एन.एन.पी #नेट नेशनल प्रोडक्टत्र-bulletin-7 9 for NOTAh jpeg copy NEW POLITICAL PARTY" N.N.P. चैनलों पर चोंचलेबाजी ;आरक्षण पर हाँजी हाँजी। नोटा के ताल पर;नाचें हैं सब नेता जी।। शेष रह गये मुल्ला काजीच


Sunday, December 16, 2018

वरना ऐसे हीं दागी,दबंग,दलबदलुओं की बल्ले बल्ले रहेगी। ं पास फेल कोई हुआ,मार लिया नोट।बाजी चुनाव की,ताड़ लिया नोटा।।जीत हार जनता की।पहचान दिया नोटा।।सिस्टम को पपु ,बना दिया नोटा।।।


  • पास फेल कोई हुआ,मार लिया नोट।बाजी चुनाव की,ताड़ लिया नोटा।।जीत हार जनता की।पहचान दिया नोटा।।सिस्टम को पपु ,बना दिया नोटा।।।अब समय का तकाज़ा है कि एक National Nota party(N N P) बने अगर नोटा को सार्थक  अधिकार नहीं मिलता है तो।और  उसे राजनीतिक दल का दर्जा हासिल हो।तब देखिए नोटा का कमाल।  और तब जनता के मन की बात परखिए, वरना ऐसे हीं दागी,दबंग,दलबदलुओं की बल्ले बल्ले रहेगी। इस एक कड़ोर तेंतीस लाख नौ हजार पाँच सौ सन्तावन नोटा वोट मेंइस चुनाव का 15 लाख नोटा वोट और जोड़ दें।सारे वैलिड वोट है।अब इसे गढ़े में फेंकने का काम चुनाव आयोग को किसने सौंपा ? मूल संविधान में ऐसा करने का अधिकार न तो संसद के पास है और न न्यायपालिका या कार्यपालिका को है।ऐसे में यह घृनित कार्य कौन कर या करवा रहा है? क्या उन पर राष्ट् द्रोह का अपराधी नहीं घोषित करना चाहिए। अब समय का तकाज़ा है कि एक National Nota party(N N P) बने अगर नोटा को सार्थक  अधिकार नहीं मिलता है तो।और  उसे राजनीतिक दल का दर्जा हासिल हो।तब देखिए नोटा का कमाल।  और तब जनता के मन की बात परखिए, वरना ऐसे हीं दागी,दबंग,दलबदलुओं की बल्ले बल्ले रहेगी।

Thursday, December 13, 2018

नोटा वोट लोकतंत्र के लिए सार्थक होता तो भाजपा के विरुद्ध पड़नेवाले अधिकतम वोट नोटा पर पड़ते ।अतः देश और नेता इस चुनाव के प्रति सजग हों।

In last 5 years, NOTA has secured 1,33,09,577 (1.33 crores) votes in State Assemblies and Lok Sabha Election combined.
In last 5 years, on an average NOTA has secured 2, 70,616 votes (2.70 lakhs) in the State Assembly Elections.
In the bye- elections in Goa, NCT of Delhi and Andhra Pradesh, a large number of people voted for NOTA, making its vote share the third or fourth highest in the respective constituencies.इस एक कड़ोर तेंतीस लाख नौ हजार पाँच सौ सन्तावन नोटा वोट मेंइस चुनाव का 15 लाख नोटा वोट और जोड़ दें।सारे वैलिड वोट है।अब इसे गढ़े में फेंकने का काम चुनाव आयोग को किसने सौंपा ? मूल संविधान में ऐसा करने का अधिकार न तो संसद के पास है और न न्यायपालिका या कार्यपालिका को है।ऐसे में यह घृनित कार्य कौन कर या करवा रहा है? क्या उन पर राष्ट् द्रोह का अपराधी नहीं घोषित करना चाहिए?

15 lakh Voters Chose NOTA Over BJP, Cong & Others Across 5 States

In the assembly elections held in Chhattisgarh, Madhya Pradesh, Rajasthan, Telangana and Mizoram, roughly 15 lakh votes have gone to NOTA (None of the Above). Around 10 pm on 11 December, NOTA (None Of The Above) received the following vote share in each of the 5 states, according to the Election Commission’s website:
  • 2.0 % in Chhattisgarh.
  • 1.4 % in Madhya Pradesh.
  • 1.3% in Rajasthan.
  • 1.1% in Telangana.
  • 0.5% in Mizoram.
Taken together, roughly 15 lakh voters chose the NOTA option across five states.
In Chhattisgarh, NOTA has a higher percentage of the vote share than the Aam Aadmi Party, Communist Party of India (CPI), Samajwadi Party (SP) and Nationalist Congress Party (NCP) ।और 64लाख नोटा मत 2014 के आम चुनाव में पूरे देश में पड़े थे।अब राष्ट् नेताओं के लिए संकेत है कि नोटा वोट लोकतंत्र के लिए सार्थक होता तो भाजपा के विरुद्ध पड़नेवाले अधिकतम वोट नोटा पर पड़ते ।अतः देश एक अभियान चाहता है जिससे वह ,मत के माध्यम से अपनी सार्थक भूमिका निभा सके।

Tuesday, November 27, 2018

केवल प्रथम पंक्ति को बेकार साबित करता है ।। और दागी दबंग दलबदलू मुखौटा को स्पोर्ट करता है।

2014 का चुनाव ,आवम काँग्रेस और क्षेत्रिये दलों को रिजेक्ट किया और विकल्प चुना।2019 में उन्हीं तीन मुद्दो(महंगाई,भ्रष्टाचार और व्यवस्था परिवर्तन) की चाहत में मतदाता अब कौन सा विकल्प चुनेंगे ! या नोटा पर मोहर लगायेंगे--बटन दबायेंगे।  अब आगे देखिये।नोटा  चुनाव परिणाम के लिए अर्थहीन है।यह एलेक्सन कमीशन के साइट पर है--इसके दूसरे पारा से  वोटर को दिया गया नोटा बटन चुनाव परिणाम के लिए अर्थहीन है।यह "असल बिहारी नोटा पर/चोर उच्चका चोट्टा पर।।दोगला दाबे दागी पर/और तेगला मुखौटा पर।।"के अन्तिम तीन पंक्तिओं के वोट पर लागू नहीं होता, केवल प्रथम पंक्ति को बेकार साबित करता है ।। और दागी दबंग दलबदलू मुखौटा को स्पोर्ट करता है।                                               6.6.6 : Votes Polled for 'NOTA' एलेक्सन कमीशन के साइट पर है,इसके दूसरे पारा से स्पष्ट है कि वोटर को दिया गया नोटा बटन चुनाव परिणाम के लिए अर्थहीन है।यह "असल बिहारी नोटा पर/चोर उच्चका चोट्टा पर।।दोगला दाबे दागी पर/और तेगला मुखौटा पर।।"के अन्तिम तीन पंक्तिओं के वोट पर लागू नहीं होता, केवल प्रथम पंक्ति को बेकार साबित करता है ।।                                               6.6.6 : Votes Polled for 'NOTA'

According to the directions of Hon'ble Supreme Court, the Election Commission made provision in the ballot papers/EVMs for None of the Above [NOTA] option so that the voters who come to the polling booth and decide not to vote for any of the candidates in the fray, are able to exercise their right not to vote for any candidate while maintain the secrecy of their ballot. The provision for NOTA has been made since General Election to State Legislative Assemblies of Chhattisgarh, Madhya Pradesh, Mizoram, NCT of Delhi and Rajasthan in October – December 2013 and continued in the General Election to State Legislative Assemblies of Andhra Pradesh, Arunachal Pradesh, Odisha and Sikkim in April – May 2014 along with the General Elections to Lok Sabha 2014.

The votes polled against the NOTA option are not taken into account for calculating the total valid votes polled by the contesting candidates for the purpose of return of security deposits to candidates. Even if the number of electors opting for NOTA option is more than the number of votes polled by any of the candidates, the candidate who secures the largest number of votes has to be declared elected.

Since introduction of NOTA, Rules 49 [0] of the Conduct of Election Rules, 1961 [relating to electors deciding not to vote] has been repealed.

Symbol for NOTA has been introduced in 2015