Tuesday, October 13, 2026
70वें दशक में यह जनान्दोलन लोकतंत्र के लिए। " उठो जगो कि हुई सुबह, रगों रगों से इस तरह, लगे कि धमनियों में गर्म
"उठो जगो कि हुई सुबह " । आजाद देश का परचम प्रथमतः आधी रात को अपनापन और विश्वास के आकाश तले, बराबरी की छितिज पर भावना की चादर ओढ़ाकर सो गए। 20वें वर्ष में अंगराई ली, स॔विद सरकार बनी, 30वें वर्ष में सतापरिवर्तन देश में हुआ, 40वें वर्ष में भावना और सहानुभूति लहर में, 50वें वर्ष में फिर सता परिवर्तन, 60वें दशक में फिर सतापरिवर्तन और 70वें दशक में यह जनान्दोलन लोकतंत्र के लिए। " उठो जगो कि हुई सुबह, रगों रगों से इस तरह, लगे कि धमनियों में गर्म खून के प्रवाह का। चल परा है कारवां_लोक विश्वास का।
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